था मैं नींद में और

था मैं नींद में और मुझे सजाया जा रहा था ,
बड़े ही प्यार से मुझे नहलाया जा रहा था …!
ना जाने था वो कौन सा अजीब खेल मेरे घर में ,
बच्चों की तरह मुझे कंधे पे उठाया जा रहा था …!
था पास मेरे मेरा हर अपना उस वक़्त ,
फिर भी मैं हर किसी के मुंह से
बुलाया जा रहा था …!
जो कभी देखते भी ना थे मोहब्बत की निगाह से ,
उनके दिल से भी प्यार मुझ पर
लुटाया जा रहा था …!
मालूम नहीं हैरान था हर कोई मुझे सोते हुए देख
कर…??

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